Jumme ki raat ko fatiya kyon padhi jaati Hain//जुम्मे की रात में फतिया क्यों होती हैं
हेलो दोस्तों अस्सलाम वालेकुम आज हम जानेंगे जुम्मे की रात में फतिया क्यों दी जाती है और फैशन से हमें क्या स्वभाव मिलता है और हम सारे मुसलमान फतिया क्यों लगवाते हैं यह ज्यादातर सुन्नी मुसलमान में होता है
क्योंकि वह अपनी बुजुर्गों के लिए और अपने नवो के लिए फातिहा लगवाते हैं इससे उन्हें बहुत ही ज्यादा स्वभाव मिलता है तो लिए आज हम जानेंगे कि फतिया क्यों लगवाई जाती हैं
Sathiyon ka swabhav
जुम्मे रात (गुरुवार की शाम) को फातिहा पढ़ने का चलन है क्योंकि जुम्मे का दिन (शुक्रवार) इस्लामी कैलेंडर में बहुत पाक और बरकत वाला माना जाता है, और जुम्मे से पहले की रात (जुम्मे की रात) को खास महत्व दिया जाता है, जहाँ लोग अपने बुजुर्गों, रिश्तेदारों की रूह (आत्मा) के लिए सवाब की नीयत से कुरान की आयतें, खासकर फातिहा, पढ़ते हैं ताकि अल्लाह उनकी मग़फ़िरत करे और उन्हें आराम मिले; यह एक तरह से अल्लाह से दुआ और बड़ों की याद का तरीका है, जिससे बरकत और सुकून मिलता है।
1.इज्ज़त और सम्मान: जुम्मे का दिन और उससे पहले की रात, इस्लामी परंपरा में खास होती है, इसलिए इस दिन अपने दिवंगत प्रियजनों को याद किया जाता है।
2. सवाब पहुंचाना: फातिहा और अन्य कुरान की आयतें पढ़कर उनका सवाब (पुण्य) उन रूहों (आत्माओं) को बख्शना, ताकि उन्हें कब्र में राहत मिले।
3. दुआ और इबादत: फातिहा, कुरान की सबसे अहम और पहली सूरह है, जो अल्लाह की तारीफ और मार्गदर्शन मांगने का एक तरीका है। इसे पढ़ने से दुआएं कबूल होती हैं और अल्लाह की रहमत मिलती है।
4. बरकत का हासिल करना: यह माना जाता है कि जुम्मे की रात फातिहा पढ़ने से अल्लाह घर और परिवार में बरकत अता फरमाता है और मुश्किलों को दूर करता है।
5. परहेज़गारों की सुन्नत: कई नेक और बुजुर्गों ने इस अमल को किया है, इसलिए इसे करना एक अच्छी सुन्नत (तरीका) माना जाता है।
कैसे पढ़ी जाती है:
आमतौर पर, जुम्मे की रात को (मग़रिब या ईशा के बाद), लोग परिवार के साथ बैठकर फातिहा, सूरह इखलास, सूरह फलक, सूरह नास पढ़ते हैं और फिर अल्लाह से दुआ करते हैं कि इसका सवाब सभी मुसलमानों की रूहों को, खासकर अपने बुजुर्गों और रिश्तेदारों को मिले।
संक्षेप में, जुम्मे रात फातिहा पढ़ना अल्लाह से जुड़ने, अपने बड़ों को याद करने और बरकत हासिल करने का एक मुकद्द
स और रूहानी तरीका है।
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